कोलेस्ट्रॉल के नियन्त्रण, बुखार,दांत मसूढे,कब्ज व इम्यूनिटी बढाने वाला मौसमी फल करौंदा
करोंदा एक झाड़ी नुमा पौधा होता है। इसका वैज्ञानिक नाम कैरिसा कैरेंडस है। करोंदा के फलों का उपयोग सब्जी और अचार बनाने में किया जाता है। करौंदे का नाम सुनकर मुंह में पानी आना तो लाजमी है. जो लोग खट्टा खाना पसंद करते हैं उन्होंने इसको अचार, चटनी, जूस और सब्जी के रूप में कभी न कभी तो जरूर खाया होगा. लेकिन स्वाद को बढ़ाने वाले इस करौंदे के बारे में क्या आप ये जानते हैं कि ये प्रोटीन, विटामिन सी,आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है और ये केवल स्वाद को ही नहीं बढ़ाता, बल्कि कई तरह की सेहत सम्बन्धी दिक्कतों को भी दूर करने में मदद करता है।
दांतों और मसूड़ों के लिए फायदेमंद
करौंदे का सेवन करना दांतों और मसूड़ों के लिए काफी फायेमंद होता है। इसके सेवन से दांतों की मजबूती तो बढ़ती ही है साथ ही मसूड़े भी स्वस्थ और मजबूत होते हैं। इसके साथ ही ये सांस की दुर्गंध और पायरिया के संक्रमण को दूर करने में भी मदद करता है।
पेट को स्वस्थ रखता है
करौंदे का सेवन करने से पेट सम्बन्धी दिक्कतें भी कम होती हैं। इसके सेवन से कब्ज, गैस और एसिडिटी तो दूर होती ही है साथ ही लूज मोशन की दिक्कत से भी राहत मिलती है, साथ ही आंतों को भी स्वस्थ रखने में अच्छी भूमिका निभाता है।
इम्यूनिटी बढ़ाता है
करौंदा खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। ये स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण करता है और शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति देता है, साथ ही इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन की कमी शरीर में नहीं होने देता है।
कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित करता
करौंदे को कच्चा, सब्जी के तौर पर या जूस के तौर पर सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है। इससे दिल से सम्बंधित बीमारियां होने का खतरा कम होता है।
वजन कम करने में मदद करता
करौंदे का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है। इसके फाइबर होने की वजह से इसके सेवन के बाद पेट काफी देर तक भरा सा महसूस होता है। जिससे कुछ और खाने की इच्छा नहीं होती है। जिसकी वजह से वजन कम करने में मदद मिलती है। करौंदे का कच्चा फल कड़वा, अग्निदीपक, खट्टा, स्वादिष्ट और रक्तपित्तकारक है. यह विष तथा वातनाशक भी है. यह एक छोटा-सा फल है, पर इसमें काफी औषधीय गुण मौजूद हैं. उपचार के आधार से इसमें साइट्रिक एसिड और विटामिन सी समुचित मात्रा में है. इसमें कई सामान्य बीमारियों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता है. इसके फल, पत्तियों एवं जड़ की छाल औषधीय प्रयोग में लाई जाती है. करौंदे के फल का स्वरस 5 से 10 ग्राम, पत्तियों का रस 12 से 24 ग्राम तक, पत्तियों का काढ़ा 60 से 120 ग्राम और फलों का शर्बत 12 ग्राम की मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है.।
करौंदे के कच्चे फल की सब्जी खाने से कब्जियत दूर होती है।
बुखार होने पर करौंदे के पत्ते का क्वाथ पिलाना लाभदायक होता है.।
सूखी खांसी में एक चम्मच करौंदे के पत्ते का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से फायदा होता है.।
इसके कच्चे फल की चटनी खाने से मसूड़ों की सूजन और दांतों की पीड़ा में लाभ मिलता है।
करौंदे के मूल को उबालकर पिलाने से सर्प विष दूर हो जाता है।
करौंदे के ताजे पत्ते लेकर उनका रस निकालें, छानकर ड्रॉपर से दो-दो बूंद आंखों में डालने से शुरुआती मोतियाबिंद खत्म हो जाता है।
करौंदे के बीजों के रोगन (बीजों को पीसकर तेल में पकाया हुआ तेल) को मलने से हाथ-पैर की बिवाई होने पर बेहतर लाभ होता है।
गर्मियों में रोजाना इसके मुरब्बे का सेवन करने से दिल के रोगों से बचाव होता है.।
इसको खाने से प्यास का शमन होता है और वायु दोष से छुटकारा मिलता है.।
’करौंदे में लौह की मात्रा होने के कारण शरीर में रक्त की कमी की समस्या दूर होती है।
यह वायुशामक है. इसके पके फल रोजाना खाने से पेट की गैस की समस्या दूर होती है।
जानवरों के कीड़े युक्त घावों में करौंदे की जड़ को पीसकर भर देने से कीड़े नष्ट होकर घाव शीघ्र भर जाते हैं।
इसकी पत्तियों का क्वाथ सिर में लगाने से जूएं नष्ट हो जाती हैं।
मूत्र संक्रमण से होनेवाली बीमारी मूत्रनली की सूजन में करौंदा लाभप्रद है. इजराइल के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, करौंदे में प्रोंथोसाइनाइडिंस नामक द्रव्य होता है, जो ई-कोली जीवाणु को मूत्राशय में चिपकने नहीं देता, जिसकी वजह से मूत्र से संबंधी बीमारियां नहीं होतीं. इतना ही नहीं, करौंदा शरीर में होनेवाले अल्सर और मुख के संक्रमण से भी बचाव करता है।
जीके श्रीवास्तव


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कमेन्ट पालिसी
नोट-अपने वास्तविक नाम व सम्बन्धित आर्टिकल से रिलेटेड कमेन्ट ही करे। नाइस,थैक्स,अवेसम जैसे शार्ट कमेन्ट का प्रयोग न करे। कमेन्ट सेक्शन में किसी भी प्रकार का लिंक डालने की कोशिश ना करे। कमेन्ट बॉक्स में किसी भी प्रकार के अभद्र भाषा का प्रयोग न करे । यदि आप कमेन्ट पालिसी के नियमो का प्रयोग नही करेगें तो ऐसे में आपका कमेन्ट स्पैम समझ कर डिलेट कर दिया जायेगा।