12 अगस्त 2021

भगवान शिव के साथ नागों की पूजा का विशेष पर्व है -नागपंचमी

 जी के श्रीवास्तव

नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा भी

नागपंचमी के दिन शिवजी के साथ ही नागों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

 हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। सावन का महीना हिन्दू धर्म में भक्ति और प्रेम का महीना कहा जाता है। सावन में भगवन शिव को पूजा जाता है।
यूपी में नाग पंचमी बड़े ही अलग ढंग से मनाई जाती है।यहां नागपंचमी के दिन गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। नागपंचमी के दिन महिलाएं घर के पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाती हैं और उसे चौराहे पर डाल देती हैं।बच्चे इन गुड़िया को कोड़ों और डंडों से पीटकर खुश होते हैं। इस परंपरा की शुरूआत के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं।

गुड़िया पीटने की कहानी

  धार्मिक मान्यता है की गरुण नागों के दुश्मन होते है। प्राचीन कहानी है एक बार गरुण से बचते हुये एक नाग ने महिला से याचना की, कि वह उसे कहीं छिपा ले। जिससे वह गुरु के प्रकोप से बच जाये। महिला ने गरुण को छिपा लिया लेकिन यह बात उसके पेट में नहीं रुकी। उसने अन्य लोगों को भी बता दी। इस बात को सुन क्रोधित हुये नागदेव ने महिला को श्राप दिया कि साल में एक दिन तुम सब पीटी जाओगी। सदियों पुरानी यह प्रथा आज भी एक पर्व के रूप में निभाई जा रही है। औरत के प्रतीक कपड़े से बनी गुड़िया को युवतियां पानी के पास या चौराहे पर फेंकती है और लड़के उनकी पिटाई करते है।
  दूसरी कहानी  की मान्यता
राजा की बेटी थी जिसका नाम गुडिया था। वह दूसरे राज्य के राजा के बेटे से प्रेम करने लगती है। दुश्मन राज्य के युवराज से प्रेम की बात गुडिय़ा के भाइयों को स्वीकार नहीं होती जिसके चलते वह गुडिय़ा की बीच चौराहे पर पिटाई कर देते हैं। उसे चौराहे पर इतना पीटा जाता है कि उसकी मौत हो जाती है। गुडिय़ा की मौत के बाद उसके सातों भाई समाज में यह घोषणा करते हैं कि ऐसा अनैतिक कार्य कोई करेगा तो उसका हश्र भी ऐसा ही होगा। उस दिन के बाद से प्रतिवर्ष यह परम्परा चलती रही और चौराहों पर कपड़े की गुडिय़ा बनाकर पीटी जाने लगी। 

भगवान शिव और नागपंचमी
नागों का हिन्दू धर्म में  प्रमुख स्थान है और भगवान शंकर नाग को गले मे मालाओ की तरह धारण करते है नागपंचमी के दिन शिवजी के साथ ही नागों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। नागपंचमी श्रावण मास में शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों में नाग को प्रत्येक पंचमी तिथि का देवता माना गया हैए परंतु नागपंचमी पर नाग की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। नागपंचमी का पर्व धार्मिक आस्था व विश्वास के  ऐश्वर्या व सुख-समृद्धि समृद्धि की कामना का प्रतीक है। यह जीव-जंतुओं के प्रति समभाव हिंसक प्राणियों के प्रति भी दयाभाव व अहिंसा के अभयदान की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमें पर्यावरण से भी जोड़ता है।

 पूजन विधि
इस दिन अपने दरवाजे के दोनों ओर गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए और धूप पुष्प आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए। इसके बाद इन्द्राणी देवी की पूजा करनी चाहिए। दहीए दूध, अक्षत, जलम पुष्प, नेवैद्य आदि से उनकी आराधना करनी चाहिए। तत्पश्चात भक्तिभाव से ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। इस दिन पहले मीठा भोजन फिर अपनी रुचि अनुसार भोजन करना चाहिए। इस दिन द्रव्य दान करने वाले पुरुष पर कुबेरजी की दयादृष्टि बनती है। मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उसे बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत के फल से जातक के कुल में कभी भी सांप का भय नहीं होगा।
नाग पञ्चमी शुक्रवार, अगस्त 13, 2021 को
नाग पञ्चमी पूजा मूहूर्त – 05:49 ए एम से 08:28 ए एम
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 12, 2021 को 03:24 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त – अगस्त 13, 2021 को 01:42 पी एम बजे

इस दिन लोग अपने घरों की दीवारों पर नागों और साँपों की आकृति बनाकर उनकी पूजा करते हैं और घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं। नाग का दर्शन करना इस दिन शुभ माना जाता है। सपेरे नाग लेकर घर-घर जाते हैं और लोगों को उनके दर्शन करवा कर अच्छी खासी आमदनी करते हैं। इसके अलावा इस त्योहार पर जगह- जगह मेले लगते है और दंगल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। जिसमें पहलवान अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते नाग पंचमी पर्व पर मेले व किसी प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं किया जा रहा है केवल लोग अपने घरों में ही भगवान शिव के साथ  नाग पूजा संपन्न  कर्पूरी आयोजित करेंगे।

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