ग्रह- बाधा नाशक, सुख-शान्ति केसाथ भगवान शिव को सर्व प्रिय है -शमी कापत्र
इस समय सावन का महीना चल रहा है। सावन भगवान शिव जी का पवित्र महीना है। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हर क्षण,हर घड़ी अनुकूल होती है।धार्मिक मान्यता है कि कि भगवान शिव को शमी की पत्तियां बहुत प्रिय हैं।शमी की पत्तियां भगवान को अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि शमी में शिव का वास होता है, इसी वजह से ये पत्ते गणेशजी को चढ़ाते हैं। शमी पत्र चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है, घर की अशांति दूर होती है। शिवलिंग पर शमी के पत्ते चढ़ाने से सभी ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं। भगवान शिव की कृपा पाने का सर्वश्रेष्ट महीना होता है. सावन की रिमझिम गुहारों में भाग्य को मजबूत करने की ताकत होती है. माना जाता है शमी के वृक्ष पर कई देवताओं का वास होता है. सभी यज्ञों में शमी वृक्ष की लकड़ियों का प्रयोग शुभ माना गया है. शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र एवं बाधा एवं नकारात्मक शक्तियों को रोकने के लिए किया जाता है.
श्रीराम ने की थी शमी के पौधे की पूजा, इसकी पत्तियां चढ़ाते समय बोलना चाहिए मंत्रअभी सावन माह चल रहा है। इस माह में शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। शिवलिंग पर अलग-अलग चीजें चढ़ाई जाती है। शिवपुराण के अनुसार शिव पूजा में फूल-पत्तियां चढ़ाने का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर बिल्व पत्र तो सभी चढ़ाते हैं, लेकिन इसके साथ ही शमी के पत्ते भी शिवजी को अर्पित करना चाहिए। आमतौर पर शमी के पत्ते शनि को चढ़ाए जाते हैं, लेकिन ये पत्तियां शिवजी और गणेशजी को भी चढ़ा सकते हैं।
श्रीराम ने किया था शमी वृक्ष का पूजन
पं. शर्मा के अनुसार शमी को पूजनीय और माना गया है। इसी वजह से लंका विजय के बाद श्रीराम ने शमी वृक्ष का पूजन किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान शमी के पौधे में ही अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे। इसी वजह से शमी का काफी अधिक महत्व है।
ऐसे चढ़ाएं शमी की पत्तियां
सावन महीने में रोज सुबह शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में गंगाजल या पवित्र जल में गंगाजल, चावल, सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर 'ऊँ नम: शिवाय' मंत्र बोलते हुए अर्पित करें।
जल चढ़ाने के बाद शिवजी को चावल, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र, जनेऊ और मिठाई के साथ ही शमी के पत्ते भी चढ़ाएं।
शमी पत्ते चढ़ाते समय ये मंत्र बोलें
शमी पत्ते चढ़ाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
शमी पत्र चढ़ाने के बाद शिवजी की धूप, दीप और कर्पूर से आरती कर प्रसाद ग्रहण करें। भगवान महादेव की पूजा अर्चना के लिए इस माह में शुभ मुहूर्त और लाभकारी योग की उपलब्धता बनी रहती है। व्रत, उपवास रख कर भगवान शिव को प्रसन्न करने की पुरानी परंपरा की पीछे शिव महिमा ही है।


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