जीवनभर अक्षय सुख समृद्धि व ऐश्वर्य का वरदान व्रतपर्व है -मां लक्ष्मी पूजन एवं अक्षय तृतीया
इस दिन भगवान सूर्य, मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त कहलाता है, इसलिए इस दिन को मांगलिक कार्यक्रमों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि उनमें जीवनभर अक्षय सुख का वरदान मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. अक्अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाई जाती है।अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्तों में से एक मुहूर्त है। इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु की आराधना में विलीन होते हैं। स्त्रियां अपने और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करके श्री विष्णुजी और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। शांत चित्त से उनकी श्वेत कमल के पुष्प या श्वेत गुलाब, धुप-अगरबत्ती एवं चन्दन इत्यादि से पूजा अर्चना करनी चाहिए। नैवेद्य के रूप में जौ, गेंहू, या सत्तू, ककड़ी, चने की दाल आदि का चढ़ावा करें। इसी दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही फल-फूल, बर्तन, वस्त्र, गौ, भूमि, जल से भरे घड़े, कुल्हड़, पंखे, खड़ाऊं, चावल, नमक, घी, खरबूजा, चीनी, साग, आदि दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
अक्षय तृतीय का महत्व
इसी तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान श्री परशुरामजी अक्षय तृतीया के दिन मां रेणुका के गर्भ से अवतरित हुए थे। चूंकि वह चिरंजीवी हैं इसलिए इस तिथि को चिरंजीवी तिथि परशुराम जयन्ती भी कहा जाता है। इस तिथि के साथ पुराणों की अन्य वृतान्त-
-सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ
-भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण और हयग्रीव का अवतरण
-ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव अर्थात उदीयमान
-वेद व्यास एवं श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रन्थ के लेखन का प्रारंभ
-महाभारत के युद्ध का समापन
-माँ गंगा का पृथ्वी में आगमन
-भक्तों के लिए तीर्थस्थल श्री बद्रीनाथ के कपाट भी इसी तिथि से खोले जाते हैं
-वृन्दावन के श्री बांके बिहारी जी मंदिर में सम्पूर्ण वर्ष में केवल एक बार इसी तिथि में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं।
अक्षय तृतीया मुहूर्त
अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्तों में से एक मुहूर्त है।अक्षय तिथि का आरंभ 14 मई 2021 को सुबह 5ः03 से अक्षय तृतीया समाप्ति तिथि 15 मई 2021 को सुबह 7ः59 तक है। पूजा का शुभ मुहूर्त 5ः30 से दोपहर 2ः18 तक है।
इस दिन खासतौर पर सोने-चांदी, नए वस्त्र, रत्न आदि की खरीदारी की जाती है। साथ ही सभी कष्टों से मुक्ति के लिए दान-पुण्य किया जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि आज के दिन किये गए पूजा-पाठ के फल का कभी क्षय नहीं होता। मान्यता के अनुसार इस दिन सोना खरीदने का खास विधान है,जिससे धन -धान्य व ऐश्वर्य सदैव बना रहे।
लेख जीके श्रीवास्तव


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