26 मई को चन्द्र ग्रहण ही नहीं पूर्णिमा का चांद सुपरमून या सुपर फलावर मून का दर्शन भी करें.....
लाकडाउन के कारण अंतरिक्ष में कम प्रदूषण से 26 मई को होने वाले सुपरमून देखने का सबसे सुन्दर समय है। सुपर मून जिसका आकार सामान्य से बड़ा होगा और यह सामान्य दिनों की अपेक्षा 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार होगा। जी हां, 26 मई को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे ज्यादा नजदीक होगा। इसी दिन पूर्णिमा का चांद भी देखा जाएगा। इसे सुपरमून या सुपर फ्लावर मून के नाम से जाना जाएगा ।
26 को दोपहर 01.53 पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे ज्यादा करीब होगा। इस समय चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी मात्र 357309 किलोमीटर रह जाएगी। चंद्रमा की ये स्थिति पेरिगी की स्थिति कहलाती है और इस स्थिति से चन्द्रमा हमें काफी बड़ा दिखना शुरू हो जाएगा। मगर सुपर मून देखने के लिए हमें सूर्यास्त का इंतजार करना होगा ,क्योंकि पूर्णिमा की स्थिति 26 मई को ही दोपहर 4.44 पर हमें प्राप्त होगी, जबकि चंद्रमा शाम लगभग 06.54 पर उदय होगा। ऐसे में सूर्यास्त के साथ ही हम सब इस सुपर मून के अद्भुद नजारे का पूरी रात अवलोकन कर सकेंगे।
कब होता है सुपरमून-
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला की वैज्ञानिक अधिकारी के अनुसार पृथ्वी की चंद्रमा से दूरी 384400 किलोमीटर मानी जाती है तथा चन्द्रमा की पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर होने पर ये दूरी लगभग 405696 किलोमीटर मानी जाती है। इस स्थिति को अपोगी कहते हैं। इसके ठीक विपरीत चंद्रमा के पृथ्वी के सबसे ज्यादा करीब होने की स्थिति को पेरिगी कहते हैं। जिसमें पृथ्वी और चंद्रमा की बीच की दूरी लगभग 357000 किलोमीटर रह जाती है। यदि चंद्रमा के पेरिगी की स्थिति में पूर्णिमा पड़ती है तो सुपरमून दिखाई देता है।
वर्ष में न्यूनतम 12 पूर्णिमा पड़ती हैं। कभी-कभी 13 पूर्णिमा भी होती हैं। मगर ऐसा कम ही होता है कि पेरीगी की स्थिति में पूर्णिमा भी पड़े। अतः यह एक खास घटना है।
वर्ष 2021 में इससे ज्यादा करीब चंद्रमा पृथ्वी के अब नही होगा । पूरे वर्ष में यह चंद्रमा की पृथ्वी से निकटतम दूरी होगी। उन्होंने बताया कि यह इस साल का अंतिम सबसे चमकदार और सबसे बड़ा फुलमून होगा। पारंपरिक रूप से मई पूर्णिमा को दूधिया चंद्रमा यानी मिल्क मून या फ्लावर मून या सुपर कॉर्न प्लांटिंग मून भी कहा जाता है। यही वजह है कि 26 को होने वाली पूर्णिमा को सुपर फ्लावर मून या सुपर मिल्क मून कहा जाएगा। सुपरमून की स्थिति में चन्द्रमा सामान्य चंद्रमा के मुकाबले सात प्रतिशत बड़ा एवं 16 प्रतिशत ज्यादा चमकदार नजर आएगा ।भारत में अधिकांश लोग सुपर सुपर मून और संपूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं देख पाएंगे क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा। देश के पूर्वी हिस्से में रहने वाले लोगों को ग्रहण का अंत दिखाई दे रहा है। आधा चंद्र ग्रहण दोपहर करीब 3 :15 बजे शुरू होगा और कोलकाता में शाम 6 :22 बजे खत्म होगा। यहां रुचि रखने वालों के लिए चंद्र ग्रहण का समय हैरू भारत में, संपूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 2 :17 बजे शुरू होगा और शाम 7 :19 बजे समाप्त होगा।ब्लड टाइम मून एक विज्ञान नहीं है लेकिन चंद्रमा में कुछ पूर्णिमा को सुपर मून मून कहा जाता है क्योंकि यह अपनी कक्षा में पृथ्वी के बहुत करीब है और इससे यह हमेशा की तरह बड़ा दिखता है। दुनिया भर में घूमते हुए चंद्रमा लाल और जंग लगा हुआ दिखता है।साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई 2021, दिन बुधवार को लगेगा। यह एक खास खगोलीय घटना होगी। क्योंकि यह सुपर मून, चंद्र ग्रहण और ब्लड मून होगा। साल के पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण को ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तर और दक्षिण अमेरिका और पूर्वी महासागर में देखा जा सकेगा। भारत की बात करें तो चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में ब्लड मून नहीं दिखेगा।
जीके श्रीवास्तव



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कमेन्ट पालिसी
नोट-अपने वास्तविक नाम व सम्बन्धित आर्टिकल से रिलेटेड कमेन्ट ही करे। नाइस,थैक्स,अवेसम जैसे शार्ट कमेन्ट का प्रयोग न करे। कमेन्ट सेक्शन में किसी भी प्रकार का लिंक डालने की कोशिश ना करे। कमेन्ट बॉक्स में किसी भी प्रकार के अभद्र भाषा का प्रयोग न करे । यदि आप कमेन्ट पालिसी के नियमो का प्रयोग नही करेगें तो ऐसे में आपका कमेन्ट स्पैम समझ कर डिलेट कर दिया जायेगा।