25 मई 2021

लॉक डाउन में गांव चौराहों की छोटी दुकाने बनी - सुपरमार्केट

 गोंडा -

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पिता  कहते हैं कि बेटवा आंखि के सामने रहै अउर का चाही।बहिरे काम बन्द होय जात हैतब भूखे रहय परत हऔर बाहर निकरौ तो पुलिस डन्डा मारत है।

पिछले साल कोरोना महामारी में ग्रामीणों के पास कोई काम नहीं था लेकिन गांवों की छोटी दुकानें ही इस कदर विकसित हुई कि बाजर के लगभग सभी सामान उपलब्ध हो सकते हैं।

देश को किसान, जवान और श्रमिक देने वाला गांव यूं ही हार नहीं मानने वाला है।गांव-कस्बों की जहां वर्तमान की चुनौतियों से जंग और भविष्य की अर्थव्यवस्था की झलक है। शहरों से ज्यादा गांवों में रौनक दिखाई पड़ने लगी है लॉक डाउन के अवसर पर बड़े बाजारों में बंदी को लेकर गांव गांव चैराहों पर छोटी बाजारे इस कदर विकसित हुई की लोगों को बाजार आने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है।

देश को किसान, जवान और श्रमिक देने वाला गांव यूं ही हार नहीं मानने वाला है। दौर की आवश्कताओं के अनुरूप गांवों में भी नई व्यवस्था आकार लेते दिख रही है। कोरोना संकट के इस काल को गांवों ने मौके की तरह भुनाया है। पिछली गर्मी में खाली रहे गांव के युवाओं के पास भी अब सांस लेने की फुर्सत नहीं है। 

यह वही गांव हैं, जहां पिछली गर्मियों में बोर दोपहरें सुनसान सन्नाटे में गुजर जाया करती थीं। गांव में छोटी-छोटी दुकानों की  अधिकतम मात्रा में खुल जाने के कारण  इस बार की गर्मी में यहां हलचल ज्यादा है। चोरी चैराहा चकररौत ,बालपुर परसपुर रामापुर पहाड़ापुर भभुआ छतौनी चैराहा आज छोटे स्थानों पर छोटी दुकानें इस कदर प्रभावी हो चुकी है कि सुपर मार्केट का रूप लेती जा रही है वहां पर कोई भी सामान आप को सरलता से सुलभ हो सकता है और कुछ लोगों ने तो होम डिलीवरी की भी सुविधाएं मुहैया करा ली हैं जिससेआज उन्हें ऑर्डर लेने और सामान पैक करने से फुर्सत ही नहीं मिल रही है। यहां राहत भरी बात यह है कि सभी अपने-अपने ग्राहकों को शारीरिक दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं और सबके हाथ पर आते-जाते समय सैनिटाइजर लगाते हैं।पिछले साल दिल्ली महाराष्ट्र मुंबई बिहार पंजाब आदि से लौटे प्रवासियों में गांव में रोजगार  का संकट दिखा  तो

काम-धंधा बंद होते ही पति पंजाब से लौट आया। आय का कोई जरिया नहीं। पांच हजार रुपये का जुगाड़ कर गांव में ही एक छोटी सी दुकान खोल ली। हालात सामान्य होते ही पति फिर कमाने बाहर जाएगा, पर आज की वैश्विक आपदा ने इस घर को दोहरी अर्थव्यवस्था का विकल्प भी दे दिया।वही विकल्प कोरोना 2 के दिनों में आजीविका का साधन बना हुआ है। 

भारत गांवों में बसता है, लिहाजा गांव की बात जरूरी है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के युग में देश की रीढ़ रहा गांव आज संक्रमण के दौर में है। ऊपर से कोरोना का दौर। लेकिन दौर कोई भी हो, शहरों से लौटे परिवारों ने आवश्यकताओं को विस्तार दिया है, तो शहरों से लौटे युवा नई संभावनाएं गढ़ रहे हैं।

रोजगार से जुड़े जानकारों का का मानना है कि इस समय लोगों की खरीदारी की प्रवृत्ति बदली है।  दूर बाजार में गांव वालों  में पुलिसिया रौब  देखने के बजाय गांव में ही सामान लेना ज्यादा सरल समझते हैं पहले जहां लोग थोड़ा-थोड़ा सामान कई बार में ले जाते थे, वहीं अब एक साथ 15-15 दिनों का सामान ले जाते हैं।सामान खरीदने से पहले वे ग्राहकों से पसंद जान लेते हैं। साथ ही यह भी तय कर लेते हैं कि कितना सामान कितने दिनों में चाहिए।

इससे घरवाले खुश हैं। बुजुर्ग पिता और माता कहते हैं -कि बेटवा आंखि के सामने रहै अउर का चाही।बहिरे काम बन्द होय जात हैतब भूखे रहय परत है और बाहर निकरौ तो पुलिस डन्डा मारत है।

अब तो पटियाला से लौटे संतोष गांव में ही रोजगार खोज रहे हैं। , गांव का माहौल बदल रहा है। लोग चाहते हैं कि एक ही जगह पर सारा सामान मिल जाए। इसलिए सुपर मार्केट और होम डिलीवरी जैसी सुविधाओं की परिकल्पना का यहां साकार रूप दिखाई पड़ने लगा है। पिछले कोरोनाकाल में आए हुए

प्रवासियों की भीड़ यहीं नहीं ठहर जाएगी। वे फिर लौटेंगे, पर स्थानीय स्तर पर भी रोजी-रोटी के पुख्ता जुगाड़ के साथ। पूर्व बिहार से सीमांचल तक करीब तीन लाख प्रवासी लौटकर आए हैं। ऐसा नहीं है कि सबके सब स्थायी भाव से ही वहां थे। पंजाब में आलू की मंडी में काम करने वालों की संख्या हजारों में है। वे तीन से छह महीने तक वहां काम करते हैं। फिर लौट आते हैं। यहां आकर मक्के की तैयारी करते हैं। जो अभी लौट आए हैं, वे मुर्गी फार्म के लिए दाना तैयार कर रहे हैं।वे अपने कामों पर गये भी लेकिन इस बार फिर लाकडाउन में काम बन्द होने पर अपने गांवों में लौटकर आए।पहले सरकार ने नरेगा में ही काम मिलने की बात कही थी लेकिन कुछ को वापस लौटना पडा था।इसके अलावा दूसरे प्रदेशों में वापस न जाने वाले कामगारों के लिए

गांव में ही लोगों को रोजगार मिल रहा है यह अच्छी बात है।  गांव का विकास भी होगा और गांव से शहरों की ओर पलायन भी रुक जाएगा ।जिससे  प्रदेश को की अर्थव्यवस्था में सुधार  मैं महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा


जी के श्रीवास्तव

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